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वनांचल के 195 परिवारों को मिलेगा जमीन का मालिकाना हक, चार गांवों में 4,763 हेक्टेयर वन संसाधन को मंजूरी

 

सुकमा के दूरस्थ वनांचल में वनाधिकार के जरिए ग्रामीणों को अधिकारों की सौगात, सामुदायिक वन संपदा के संरक्षण और आजीविका संवर्धन का खुलेगा नया रास्ता

 

सुकमा। जल, जंगल और जमीन से जुड़े पारंपरिक अधिकारों को मान्यता देने की दिशा में सुकमा जिले में महत्वपूर्ण पहल की गई है। जिले के कोंटा विकासखंड के दूरस्थ वनांचल में व्यक्तिगत वनाधिकार के 195 प्रकरणों को स्वीकृति प्रदान की गई है। इसके साथ ही चार गांवों में कुल 4,763.658 हेक्टेयर सामुदायिक वन संसाधन क्षेत्र के अधिकार पत्र जारी करने का निर्णय लिया गया है। इस पहल से वनांचल के ग्रामीणों और स्थानीय जनजातीय समुदायों को उनके पारंपरिक अधिकारों की मान्यता मिलने के साथ वन संसाधनों के संरक्षण एवं आजीविका संवर्धन के नए अवसर मिलने की उम्मीद है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य शासन की वनाधिकार संबंधी योजनाओं के तहत अंतिम छोर पर बसे ग्रामीणों तक शासकीय योजनाओं का लाभ पहुंचाने के प्रयास किए जा रहे हैं। इसी क्रम में सुकमा जिले के दूरस्थ ‘नियद नेल्लानार’ क्षेत्र के ग्रामीणों को वनाधिकार पत्र उपलब्ध कराने की दिशा में यह निर्णय महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

 

332 दावों की समीक्षा, 195 को मिली स्वीकृति

 

कलेक्टर अमित कुमार की अध्यक्षता में सोमवार को कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में जिला स्तरीय वन अधिकार समिति की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में कोंटा उपखंड स्तरीय समिति से प्राप्त 332 व्यक्तिगत वनाधिकार दावों की विस्तारपूर्वक समीक्षा की गई। परीक्षण के बाद समिति ने सर्वसम्मति से 195 प्रकरणों को स्वीकृति देते हुए संबंधित हितग्राहियों को अधिकार पत्र जारी करने का निर्णय लिया।

 

प्रशासन ने शेष 132 राजस्व वन प्रकरणों में जीपीएस तकनीक के माध्यम से अक्षांश एवं देशांतर के आधार पर सटीक सीमांकन पूरा कर शीघ्र अधिकार पत्र जारी करने के निर्देश दिए। वहीं, नियमानुसार परीक्षण में अपात्र पाए गए पांच प्रकरणों को निरस्त करने का निर्णय लिया गया। इनमें काबिल कास्त, चट्टान मद एवं दोहरे दावों से संबंधित मामले शामिल हैं।

 

चार गांवों को 4,763.658 हेक्टेयर सामुदायिक वन संसाधन की मंजूरी

 

बैठक में सामुदायिक वन संसाधन अधिकार के चार महत्वपूर्ण प्रकरणों को भी स्वीकृति प्रदान की गई। इसके तहत संबंधित गांवों के लिए निम्नलिखित रकबे के अधिकार पत्र जारी करने का निर्णय लिया गया है।

 

– ग्राम अरलमपल्ली: 1,728.670 हेक्टेयर

– ग्राम जग्गावरम: 1,527.106 हेक्टेयर

– ग्राम केरलापेन्दा: 1,402.482 हेक्टेयर

– ग्राम पुनपल्ली: 105.400 हेक्टेयर

इन चारों गांवों का कुल स्वीकृत क्षेत्रफल 4,763.658 हेक्टेयर है। सामुदायिक वन संसाधन अधिकारों की मान्यता से स्थानीय समुदायों को पारंपरिक वन क्षेत्रों के संरक्षण, प्रबंधन और सतत उपयोग की दिशा में महत्वपूर्ण आधार मिलेगा। इससे स्थानीय आजीविका को मजबूत करने तथा वन संपदा के संरक्षण में ग्रामीणों की भागीदारी बढ़ाने की संभावनाएं भी विकसित होंगी।

पारदर्शी प्रक्रिया और समयबद्ध निराकरण पर जोर

जिला स्तरीय समिति की बैठक में वनाधिकार दावों के परीक्षण में पारदर्शिता, तकनीकी सीमांकन और पात्र हितग्राहियों को समय पर अधिकार पत्र उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया गया। शेष प्रकरणों का नियमानुसार निराकरण कर पात्र ग्रामीणों तक अधिकारों का लाभ पहुंचाने के निर्देश दिए गए।

वनाधिकार कानून के प्रभावी क्रियान्वयन से वनांचल के उन परिवारों को राहत मिल सकती है, जिनकी आजीविका और सामाजिक-सांस्कृतिक परंपराएं जंगल से जुड़ी हुई हैं। व्यक्तिगत और सामुदायिक वनाधिकारों की मान्यता ग्रामीणों को अपने पारंपरिक संसाधनों के संरक्षण तथा जिम्मेदार उपयोग में अधिक सक्रिय भूमिका निभाने का अवसर प्रदान करती है।

बैठक में ये रहे उपस्थित

जिला स्तरीय वन अधिकार समिति की बैठक में जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी मुकुन्द ठाकुर, सहायक आयुक्त हेमंत सिन्हा, जिला पंचायत सदस्य हुंगाराम मरकाम, माड़े बारसे एवं कोरसा सन्नू सहित संबंधित अधिकारी और समिति के सदस्य उपस्थित रहे।

सुकमा जिले के दूरस्थ वनांचल में वनाधिकार दावों की स्वीकृति को ग्रामीणों के पारंपरिक अधिकारों को मान्यता देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अब स्वीकृत प्रकरणों में अधिकार पत्र जारी होने के साथ ही हितग्राहियों को उनके अधिकारों का औपचारिक दस्तावेज उपलब्ध कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

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